जस्टिस काटजू इस्लामी शिक्षा के खिलाफ जहर उगलने से पहले क़ुरान शरीफ का अभ्यास करे. समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, विधायक अबू आसीम आझमी की काटजू को सलाह. इस्लाम ही ऐसा धर्म है जिसमे औरतो को तमाम अधिकारो से नवाजा है. दारूल कजा और मुस्लीम पर्सनल ला बोर्ड पर टिप्पणी करना कानून के खिलाफ.

मुंबई : सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के पूर्व न्यायधीश और प्रेस कौसील ऑफ इंडिया के चेअरमन काटजू ने इस्लामी शरीयत के खिलाफ जहर उगलते हुये इस्लाम मे औरतो के साथ होने वाली ज्याद्तियो और तीन तलाक के मसले पर मुस्लीम पर्सनल ला को अपनी टिप्पणी का निशाना बनाते हुये औरतो के अधिकारो के नाम, औरतो के साथ होनेवाली नाइन्साफियो के हवाला पर अबू आसीम आझमी ने सख्त निषेध किया है. यहा मुंबई मे जस्टिस काटजू के इस्लामी शरीयत के खिलाफ दिये जानेवाले भडकाऊ और जहर उगलने वाले बयान की अबू आसीम आझमी ने सख्त शब्दो मे निंदा करते हुये कहा कि जस्टिस काटजू एक उच्च शिक्षित होने के साथ साथ कानून के विशेषज्ञ भी है. उन्हे इसकी जानकारी होनी चाहिये कि संविधान मे तमाम धर्मो को अपने धर्म के मुताबिक जिन्दगी गुजारने की इजाजत है. मुस्लीम पर्सनल ला बोर्ड को भी संविधान मे जगह दी गयी है. इसीके की वजह से दारूल कजा और अंजुमने अस्तित्व मे आयी है.

इस्लामी शरीयत और दारूल कजा पर भी इसके पहले काटजू जहर उगल चुके है. जस्टिस काटजू औरतो के अधिकार की बात तो करते है लेकीन औरतो को उनके अधिकार दिये जा रहे, उस पर कभी भी बहस नही करते. इस्लाम धर्म मे औरतो को अधिकारो से नवाजा गया है. इस्लाम ही एक ऐसा धर्म है, जहा औरतो को सम्मान मिलता है. जाहीलीयत के दौर मे बच्चो के जन्म को लोग मनहूस समझते थे लेकीन पैगंबर सल्लल्लाहो आलही वसल्लम के बाद औरत को उनकी असली पहचान मिली है. अबू आसीम आझमी ने कहा की जस्टिस काटजू एक कानूनी विशेषज्ञ है इसलिये उनको सलाह देता हू कि पहले वह खुद इस्लामी शिक्षा का अभ्यास करे और उसके बाद ही क़ुरान और सुन्नत और तलाक पर अपनी राय दे. इसलिये इस्लामी शिक्षा पर टिप्पणी करने का उन्हे कोई अधिकार नही है. उन्होने आगे कहा यदी जस्टिस काटजू भाषांतरीत क़ुरान का अभ्यास करेंगे तो उनका दिल भी निर्देश से गद्गद हो जायेगा और शायद ऐसी बाते करने से परहेज करेंगे. अबू आसीम आझमी ने सख्त शब्दो मे निंदा करते हुये कहा कि शरीयते इस्लामिया पर इस तरह की टिप्पणी मुसलमान बर्दाश्त नही कर सकता. जस्टिस काटजू से मुझे यह कहना कि वह औरतो के अधिकार की बात करते है तो उन्हे सिर्फ इस्लामी शिक्षा की याद आती है. वह इस्लामी शिक्षा की पवित्रता को क्यू नही देखते, जहा औरतो को सन्मान हांसिल है? देश मे जहा औरतो को नुमाईश की चीज बना दिया गया है, बल्की इस्लाम मे औरतो को घर के मालिक की हैसियत दी गयी है. अबू आसीम आझमी ने कहा कि इस तरह के बयान से मुसलमानो को बदनाम करने कोशिश की जा रही है. उन्होने अपने भडकाऊ बयान मे कहा था कि इस्लाम मे औरतो को संपत्ती मे अधिकार की भी सहुलत नही दी गयी है. काटजू ने कहा कि हिंदूओ मे भी पहले औरतो के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया किया जाता था और मर्दो को ज्यादा शादिया करने की परमिशन दी गयी थी, लेकीन हिंदू कानून के तहत यह आजादी खतम कर दी गयी है. लेकीन इस्लाम मे मर्दो को तो तीन तलाक़ देने का अधिकार है. लेकीन औरते तलाक़ नही ले सकती. अबू आसीम आझमी ने काटजू के इस भडकाऊ बयान का जवाब देते हुये कहा कि इस्लाम मे तलाक़ के बहुत मसले है. तीन तलाक़ देने का मसला भी तीन हिस्सो मे शामिल है. इन तमाम मसले और दलीलो का अभ्यास करना बहुत जरूरी है. 

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Abu Asim Azmi