कविता करकरे की मौत हेमंत करकरे के सदमे का नतीजा. स्व.करकरे की विधवा की मौत किन हालत मे हुई उसकी जांच जरूरी, मुंबई हमलो पर कई सवालात उठाये थे. इसलिये इसकी पुरी जांच भी की जानी चाहिये : अबू आसीम आझमी की मांग.

मुंबई : मुंबई/महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, विधायक अबू आसीम आझमी ने कर्तव्यदक्ष, इमानदार पुलिस अधिकारी, एटीएस के भूतपूर्व चीफ स्व.हेमंत करकरे की विधवा कविता करकरे की अचानक मौत पर कहा कि कविता करकरे शुरुवात से ही अपने पती की मौत पर शक का इजहार करती रही थी, इतनाही नही वह पती के मौत के सदमे से उभर भी नही पायी थी, शायद उनके ब्रेन हेमरेज की यही वजह हो, ऐसे मे लोगो का यह कहना है कि कविता करकरे की मौत भी उसी वजह से हुई है. उन्होने आगे कहा कि कविता करकरे अपने पती की मौत के बाद इस कदर परेशान और दुखी रहती थी कि उनकी परेशानी उनके चेहरे से साफ झलकती थी लेकीन इसी परेशानी और सदमे ने उनको अंदर ही अंदर खत्म कर दिया. श्रीमती कविता करकरे की अचानक मौत कई सवाल उठाती है, जिसकी जांच होनी चाहिये कि कविता करकरे को किन हालात मे ब्रेन हेमरेज की शिकायत हुई और वह कीस वजह से इतनी परेशान थी, कविता करकरे ही नही बल्की २६/११ मुंबई हमलो मे शहीद होने वाली तमाम जाबांजो की विधवाओ ने मुंबई हमले की जांच पर सवाल उठाये है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त स्व.अशोक कामठे की विधवा एड.विनीता कामठे ने तो मुंबई के पुलिस आयुक्त राकेश मारिया के उस वक्त के कंट्रोल रूम की कारकीर्दगी पर भी सवाल उठाया है और आर.टी.आई. से उन्हे जो जानकारी उपलब्ध हो गयी थी, वह भी अधुरी थी. और उसमे छेडछाड की गयी थी. इस बात को आर.टी.आई. कमिशनर रत्नाकार गाईकवाड ने भी कबूला था. ऐसे मे यह मालूम करना चाहिये कि हेमंत करकरे की मौत के बाद कविता करकरे पर क्या बीती? और क्या टेन्शन और परेशानी थी? इस तमाम मामले को सरकार को उजागर करना चाहिये. हेमंत करकरे की मौत की बाद से ही उन्होने कई सवाल उठाये थे लेकीन बाद मे अचानक वह और उनके घरवाले इस मामले मे खामोश होकर रह गये. यह बाते जांच के दायरे मे आती है कि क्या करकरे फेमिली को खामोश कर दिया गया था या फिर कोई दुसरी वजह थी? जो इस फेमिली को अंदर ही अंदर खाये जा रही थी. जिसकी वजह से कविता करकरे का दुखद निधन हुआ है.

 

अबू आसीम आझमी ने कर्तव्यदक्ष, इमानदार पुलिस अधिकारी स्व.हेमंत करके की विधवा कविता करकरे के दुखद निधन पर उनके परिवार, और चाह्ने वालो के प्रती शोक संवेदना व्यक्त करते हुये कहा कि स्व.हेमंत करकरे और कविता करकरे ने हमेशा से ही राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की कोशिश की थी और उन्होने कहा कि हेमंत करकरे ने धर्मनिरपेक्षता और कर्तव्यनिष्ठता का सबूत देते हुये अपने कर्तव्य को निभाते हुये बलिदान दिया. उनके इस बलिदान को कभी भुलाया नही जा सकता. किसी तरह हेमंत करकरे ने ना सिर्फ यह कि असली आतंकवादियो को बेनकाब किया बल्की मुसलमानो पर लगे आतंकवाद के विकृत दाग भी धूल दिये. मुसलमान उन्हे हमेशा याद रखेंगे. अबू आसीम आझमी ने कविता करकरे के बच्चो को धीरज देते हुये कहा कि उनके पिता और माता एक इमानदार और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व होने के साथ-साथ जालीमो का मुकाबला करने वालो मे थे. उन दोनो ने ना सिर्फ अपने बच्चो को परवरीश दी बल्की देश की एकता, अखंडता और भाईचारगी को बढावा देने की कोशिश की. ऐसे मे हम उनके परिवार के दुख मे बराबरी के शरीक है. 

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Abu Asim Azmi