अबू आसिम आज़मी के बारे में

अबू आसिम आज़मी- पीड़ित लोगों और वंचित समुदायों के नेता

बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद मुंबई में हुए दंगों ने महाराष्ट्र के मुस्लिम समुदाय को तबाह कर के रख दिया है. बाद में मार्च 1993 के बम धमाकों ने जुल्म व सितम की चक्की में पिस रहे दहशत के मारे मुसलमानों की परेशानियों को और बढा दिया। और इस के साथ ही वह पुलिस फोर्स के उस वर्ग के लक्ष्य बन गए जिसे पहले ही से आतंकित इस समुदाय को और आतंकित करने में और उन पर जुल्म करने में मजा आता है।

अबू आसिम आज़मी , जो उस वक्त तक एक बहुत ही काम्याब, उँची क़ाबिलियत के, अमीर और अच्छे ताल्लुकात वाले मुस्लिम ब्योपारी की हैसियत से मशहूर हो चुके थे, वह भी पुलिस फोर्स के एक वर्ग की निर्दोष मुसलमानों को आतंकवाद के झूठे मामलों में फंसाने की कुटिल कारस्तानियों के शिकार हो गए। अबू आसिम आज़मी इस हद तक खूशनसीब रहे कि वसाएल की उन के पास कमी नहीं थी, और अपनी बेगुनाही साबित करने और बरी किए जाने के लिए उन्होंने सुप्रिम कोर्ट तक केस लड़ा । इस केस ने उनकी जिंदगी का रुख बदल दिया। उन्होंने महसूस किया कि अगर पुलिस उन के जैसे एक बहुत ही बाअसर और मालदार ब्योपारी को इस तरह आतंक के झूठे मामले में फँसाने की हिम्मत कर सकती है, तो समुदाय के आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के उन बेगुनाह लोगों के साथ क्या नहीं होता होगा, जो ऐसे अफसोसनाक हालात का शिकार हो जाते हैं और उनके पास निचली अदालतों में बचाव के लिए एक वकील जुटाने के भी पैसे भी नहीं होते हैं। चुँकि अबू आसिम आज़मी ख़ुद फ़िर्क़ावारियत और ज़ुल्म का शिकार हो चुके थे उन्होंने महाराष्ट्र में फ़िर्क़ापरस्त और तअस्सुबपसंद ताकतों के ख़िलाफ़ लड़ने की ख्वाहिश और ज़रूरत महसूस की वह चाहे सियासत में हो या हुकूमत में ब्योरोक्रेसी में हो या पुलिस में। और इस तरह महाराष्ट्र में एक नई,बेबाक, और कारगर मुस्लिम क़ियादत उभर कर सामने आई । जिस ने मुसलमानों को ही नहीं बल्कि उ.प्र.,बिहार और दुसरी रियासतों के परप्रांतीयों को जिन्हें मोक़ापरस्त और इलाक़ापरस्त ताक़तें धमकाती थीं, उनका शोषण करती थीं,उन पर हमले करती थीं उन्हें संगठित किया और इसके साथ ही दलितों, बौद्ध धर्मियों, अल्पसंख्यकों और पिछड़े समुदायों को श्री मुलायम सिंह यादव के कुशल नेतृत्व के तहत समाजवादी पार्टी की धर्मनिरपेक्ष मंच पर एकजुट किया ।

अबू आसिम आज़मी प्रतिष्ठित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र हैं. और वैसे भी, वह दिल से, अलीगढी संस्कृति के संरक्षक है । वह समुदाय और राष्ट्र के ग़र्जवग़ायत के प्रति संवेदनशील हैं और उनका बहुत ही ख्याल रखते हैं । उनके पिता हाजी नियाज़ अहमद आज़मी , जो आजमगढ़ , उ. प्र. के थे, वह भी मुंबई आए । वह एक काम्याब ब्योपारी और परोपकारी थे ।

अबू आसिम आज़मी अगस्त 8,1955 को मंजिर पट्टी, आजमगढ के एक बड़े, समृद्ध, शिक्षित परिवार में पैदा हुए । उनकी प्रारंभिक तालीम मदरसा-ए- इस्लामिया, ,बाग मीरपेठू आजमगढ़ यू.पी. में हुई, जबकि प्राथमिक और स्कूल की तालीम आज़मगढ़ और जौनपूर में हुई । उस के बाद, खानदान की परंपरा के अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भेजा गया । अबू आसिम आज़मी ने कॉमर्स फेकल्टी से ग्रेजवेशन किया जिसके बाद तिजारत और कारोबार में अपने कदम बढ़ाने के लिए 1973 में वह मुंबई आए

उनहोंने विशाल अवसरों के इस शहर में विभिन्न किसम के कारोबार में अपनी किसमत आजमाई और वह टूर्ज ऍंड ट्रेवेल्स, होटल और जायदाद की खरीदोफरोख्त के कारोबार मों वह काम्याब हो गए । एक व्यापारी के रूप में उन्होंने विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से समाज के योग्य वर्गों की सेवा जारी रखी । 1992-93 में मुंबई के दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण सांप्रदायिक दंगों के दौरान उन्हों ने स्वर्गीय मौलाना जियाउद्दीन बुखारी के साथ मिल कर मुंबई में दंगा पीड़ितों के लिए भारी पैमाने पर राहत और बचाव अभियान का आयोजन किया । इन दंगों और बम धमाकों के बाद, वह खुद सांप्रदायिकता का निशाना बने। इस तरह हालात ने उन्हें राजनीति में शामिल होने की राह हमवार की । अबू आसिम आज़मी 1995 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और मुंबई प्रदेश के सदर निर्वाचित हुए ।

समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर चुनावी लड़ाई में दाखिल हुई । 1995 में श्री अबू आसिम आज़मी के सक्षम नेतृत्व में समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव लड़े और मुंबई से नेहरू नगर और उमरखाडी 2 सीटें जीतीं । बाद के बी.एम.सी. चुनावों में मुंबई से समाजवादी पार्टी को जबरदस्त काम्याबी हासिल हुई । उस के टिकट पर 22 कार्पोरेटर चुने गए । इस तरह महाराष्ट्र विधानसभा में समाजवादी पार्टी को पहली बार काम्याबी मिली जब समाजवादी पार्टी का एक उम्मीदवार विधान परिषद का सदस्यचुना गया । एक और विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 4 विधानसभा सीटें जीतीं ।

श्री अबू आसिम आज़मी की जादूई कियादत का करिश्मा था कि समाज वादी पार्टी को मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के विभिन्न भागों से काम्याबी मिली । समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताऔं को फुसलाकर पार्टी छुडवाने की साजिशों के जरीए पार्टी की सफलता को अस्थिर करने की विरोधियों की कोशिश के बावजूद भिवंडी, मुंब्रा जैसे मुकामों पर समाजवादी पार्टी ने सत्ता में हिस्सेदारी की ओर राह बनाई । श्री अबू आसिम आज़मी की बेबाक और निडर कियादत के जादूई असर ने समाजवादी पार्टी का झंडा उंचा रखा औरपूरे महाराष्ट्र में काम्याबी के झंडे गाडे.

श्री अबू आसिम आज़मी ने शेर ए महाराष्ट्र और काइद ए मिल्लत जैसे खिताबों के साथ संसद में कदम रखा । वह 2002 में राज्य सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए और 2008 तक कारगुजार रहे । पार्लमेंट की छह साल की मीआद खिदमत के दौरान वह सुरक्षा, वित्त वगैरा जैसे विभिन्न मंत्रालयों की विभिन्न संसदीय समितियों के सदस्य के तौर पर खिदमात अंजाम दीं । उन्होंने संसद में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अहमियत के हामिल विभिन्न मुद्दों को उठाया । वह मुसलमानों, दलितों, अल्पसंख्यकों और भारत के विभिन्न वंचित समुदायों की एक मुखर और गुँजदार आवाज बने रहे । राज्य सभा का रिकॉर्ड स्वयं गर्जोगायत और समुदाय के लिए श्री अबू आसिम आज़मी की सक्षम, गंभीर और प्रतिबद्ध नेतृत्व के गुणोंको जाहिर करता है ।

2009 में उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ा और 2 निर्वाचन क्षेत्रों से एक साथ से निर्वाचित किये गए । इस चुनाव में समाजवादी पार्टी को 2 अधिक विधायक सीटों पर काम्याबी मिली । इस प्रकार आलोचकों को गलत साबित किया ।

महाराष्ट्र विधानसभा में श्री अबू आसिम आज़मी की मौजूदगी से महाराष्ट्र के आतंकित समुदायों को एक आवाज मिली । वह चाहे मुसलमान हों या पर-प्रांती, उ. प्र. बिहार वाले हों , जो महाराष्ट्र की राजनीतिक सेनाओं के मश्के सितम बने हुए थे। पहले ही दिन से, अबू आसिम आज़मी , अपने दो सहयोगियों के साथ, मुसलमानों, परिप्रवासीयों, दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य पिछड़े समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और हितों की रक्षा का फर्ज ऐसे बेबाक और निडर अंदाज में है निभा रहे हैं जिस की कोई मिसाल महाराष्ट्र विधान सभा के इतिहास में नहीं मिलती । उन्हों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों की बुनियादी सहूलतों और सुविधाओं के लिए भी संघर्ष किया । माजी में अपने क्षेत्र के लिए किसी अन्य विधायक ने ऐसा कभी नही किया । वह जिस इलाके की नुमाइंदगी कर रहे हैं वह शहर के सबसे वंचित और उपेक्षित लोगों की आबादी वाला इलाका है जहाँ मुसलमानों, बौद्ध धर्मियों, दलितों और पिछड़े वर्गों की बडी आबादी है । इस के अलावा यह इलाका अभी तक राज्य सरकार, बी.सी.एम. द्वारा सबसे उपेक्षित था। विधानसभा, बीएमसी, और ढीले सरकारी विभाग का रिकॉर्ड गवाह है कि श्री अबू आसिम आज़मी एक अवामी नुमाइंदा एक उन्मुख, निडर, साहसी और अपने निर्वाचन क्षेत्र के मुखर विधायक की सिफात से लैस हैं ।

उनकी कियादत को उर्दू जबान के कवि डॉ. अल्लामा इकबाल के इस शेर से अच्छी तरह से जाहिर किया जा सकता है :

आईने जवाँमर्दाँ हकगोई व बेबाकी
अल्लाह के शेरों को आती नहीं रुबाही

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Abu Asim Azmi