मोहनदास करमचंद गांधी

कुछ लोगों ने अपना समय बदला, एक आदमी ने पूरी दुनिया को हर समय के लिए बदल दिया.....

मोहनदास करमचंद गांधी (२ अक्टूबर १८६९ - ३० जनुअरी १९४८) ब्रिटिश शासित भारत में भारतीय राष्ट्रवाद के पूर्व प्रमुख नेता थे. अहिंसा युक्त सविनय अवज्ञा के ज़रिये गांधीजी ने भारत को आज़ादी दिलाई और विश्व भर में नागरिक अधिकारों के आंदोलन को प्रेरित किया . गांधीजी को भारत में बापू भी कहा जाता है.

गांधीजी ने १९३० में ब्रिटिश द्वारा लगाये गए नमक कर के विरोध में ४०० किमी दांडी नमक मार्च में भारतीयों का नेतृत्व किया, और बाद में ब्रिटिश भारत छोड़ो का नारा बुलंद किया . वह दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों में कई अवसरों पर कई वर्षों के लिए जेल गए. गांधीजी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का अभ्यास करने का प्रयास किया, और दुसरों को भी ऐसा ही करने का सन्देश दिया.

वह एक आत्मनिर्भर आवासीय समुदाय में विनय रहते थे और पारंपरिक भारतीय धोती और शाल पहना करते थे, जो हाथों से चरखे पर धागे से बुनी जाती थी. उन्होंने हमेशा सादा शाकाहारी खाना खाया और आत्म शुद्धि व सामाजिक विरोध के लिए साधन के रूप में लंबे समय तक उपवास किया. गांधीजी के दृष्टि में एक स्वतंत्र भारत का स्वप्न धार्मिक बहुलवाद पर आधारित था. गांधीजी को भारत में, आधिकारिक तौर पर नहीं, हालांकि आमतौर पर राष्ट्र पिता माना जाता है.

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Abu Asim Azmi